रविवार, 29 सितंबर 2013

मत आना मेरे देश मोहन

मत आना मेरे देश मोहन
यांह के गली कुचे
लाशों से अटे पड़े है
वर्षो के नफ़रत के दाग
राम ,रहीम खून से धोने चल पड़े हैं
रो पड़ोगे तुम
जब सुनोगे उस धरती पर
तान नफ़रत की
जहाँ तूने प्रेम की बांसुरी बजाई थी
मत आना मेरे देश मोहन ".....
तांडव हो रहा लाशों का वहां
जहां तूने गोपियों संग रास रचाई थी
गर्मी में भी सेक रहे अपनी रोटी को
जहाँ तूने सुदामा की भूख मिटाई थी
मत आना मेरे देश मोहन
जाग पड़ा है मामा वहां फिर
जो धरा तूने कन्स से
मुक्त करायी थी
हर गली में दुशासन बस रहा
जहाँ तूने द्रौपदी की लाज बचायी थी
मत आना मेरे देश मोहन
"देशबंधु
See More

शनिवार, 28 सितंबर 2013

मत आना मेरे देश मोहन
यांह के गली कुचे
लाशों से अटे पड़े है
वर्षो के नफ़रत के दाग
राम ,रहीम खून से धोने चल पड़े हैं
रो पड़ोगे तुम
जब सुनोगे उस धरती पर
तान नफ़रत की
जहाँ तूने प्रेम की बांसुरी बजाई थी
मत आना मेरे देश मोहन ".....
तांडव हो रहा लाशों का वहां
जहां तूने गोपियों संग रास रचाई थी
गर्मी में भी सेक रहे अपनी रोटी को
जहाँ तूने सुदामा की भूख मिटाई थी
मत आना मेरे देश मोहन
जाग पड़ा है मामा वहां फिर
जो धरा तूने कन्स से
मुक्त करायी थी
हर गली में दुशासन बस रहा
जहाँ तूने द्रौपदी की लाज बचायी थी
मत आना मेरे देश मोहन
"देशबंधु
कोई तो बता दे की एसा क्यों हो रहा है
हस्पताल में खून नहीं और चौराहे पर खून बिखरा पड़ा