मेरे शब्द :मेरे अपने : क्या: क्या पूछते हो पता मेरा
हैसियत या जात मेरी
मिटटी का शरीर लिए फिरता हूँ
आँशुयों के सैलाब में बहता रहता हूँ
चंद निबालों ...
सोमवार, 18 अगस्त 2014
सोमवार, 11 अगस्त 2014
मेरे शब्द :मेरे अपने : न बात करता न ही बातों में तुम्हारा जिक्र होता...
मेरे शब्द :मेरे अपने : न बात करता न ही बातों में तुम्हारा जिक्र होता...: न बात करता न ही बातों में तुम्हारा जिक्र होता ये तो दर्द है जो बार –बार ... नज्म बनकर उतर आता है तुम्हारा नाम जुबां पर आ जाए मुम...
मेरे शब्द :मेरे अपने : क्या ऐसा नहीं हो सकता
मेरे शब्द :मेरे अपने : क्या ऐसा नहीं हो सकता: क्या ऐसा नहीं हो सकता कि राम मस्जिद में रह जाए और खुदा भी अयोध्या हो आये हिन्दू ही मुसलमान नहीं मुसलमान भी हिन्दू हो जाए टुट जाये दिलों के...
मेरे शब्द :मेरे अपने : इतने रिश्तों इतनी उलझनों के बाद भी डायरी के कु...
मेरे शब्द :मेरे अपने : इतने रिश्तों इतनी उलझनों के बाद भी डायरी के कु...: इतने रिश्तों इतनी उलझनों के बाद भी डायरी के कुछ पन्ने जीवन के उत्तरार्ध में खाली रहने लगे हैं ... कुछ लिखे पन्ने खनकते सिक्कों से ...
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