शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

रुलाया जब भी

रुलाया जब भी जिंदगी ने
हर आँशु में तुम ही तुम नजर आई माँ
तेरे लाडले को सैलाब के परे से भी
हर ठोकर नजर आई माँ
गुजार दूँ हर लम्हा तनहा ही पर
जमाने की हर ठोकर के बाद
तेरी ही सलाह याद आई माँ
जाग जाता हूँ रातो को जब
हर बार करवटें बदलते तेरी
वो लोरी याद आई है माँ
रो लेता हूँ जी भर कर अब भी
झिलमिलाती इन आँखों में
तुम ही तुम नजर आती हो माँ
तनहा सी इस जिंदगी में
खुदा के इस जहाँ में
अल्लाह से भी ऊपर
"बंधू" नजर आई है मेरी माँ ............. देशबन्धु

रविवार, 16 नवंबर 2014

मेरे शब्द :मेरे अपने : जब भी मैं रो लेता हूँ

मेरे शब्द :मेरे अपने : जब भी मैं रो लेता हूँ: जब भी मैं रो लेता हूँ तेरे दिए जख्म सी लेता हूँ जब भी तुम याद आते हो ग़मों के ज़ाम चुपके से पी लेता हूँ डर लगता जब तन्हाई से तेरी तस्वीर ...