मंगलवार, 13 नवंबर 2018

क्या ऐसा नहीं हो सकता

क्या ऐसा नहीं हो सकता
कि राम मस्जिद में रह जाए
और खुदा भी अयोध्या हो आये
हिन्दू ही मुसलमान नहीं
मुसलमान भी हिन्दू हो जाए
टुट जाये दिलों के दरमियान की
हर दिवार
और समय की धुल भी चुटकी
में उड़ जाये
बन गए जो मिलों के फासले ...
वो भी मिट जाये
और ईद दीवाली भी मन जाये
हो गयी जो राहें अलग-अलग
वो चौराहे पर एक हों
और मंजिल भी मिल जाये
अब तो जी चाहता है ""बन्धु ""
मजहब की सियासत करने वालों को
कहीं दूर छोड़ आयें
और फिर राम रहिम का भेद भी मिट जाए
क्या ऐसा नहीं हो सकता कि ...............?
""देशबंधु ""