लम्हा लम्हा जिंदगी बसर गए
गुजर ना पये जो लम्हे वो नसीब बन गए
कैसे उकेर पाता में तुम्हारी तसवीर
मेरे आंसुओ के रंग हवा हो गये
देखी जो जमाने की चाल्बाजी
तब से हम तेरे अंदाज़ के कायल हो गए
गुजर जाती वो उदास लम्हों की बारात भी
पर तुम ना जाने कैसे
अपनो का साथ छोड़ गए
दे जो खुशी हौसला वो अच्छी है
कैसे फिर कोई हौसालों का साथ छोड़ दे