उस पार
क्षितिज के उस
पार
हर पल अपना
होगा
तेरा ही अहसास होगा
न तुमसे दूरी का दुःख
होगा
तुम होगे , हम
होगे
बस नहीं होगा
तो
दुनिया का ख्याल
होगा
बीते पलों के
साये होंगे
आने वाला
हर हसीन
ख्याल होगा
बस जहां से
रुखसत हो
जाऊं
तो ,न तेरा
न मेरा
बस हमारा प्रयाणं
होगा
अंधेरों कि इस
भूलभुल्या में
भटक गया हूँ
दौड़ कर आ जाऊं
उस पार तो
बस चिर उजियारा
होगा
हर गुजरती सांस
झिंझोड़ जाती है
क्षितिज के उस
पार
तो बस सांस
से परे
का
अहसास होगा
बस न होगा
तो
अधूरे पन का ख़याल होगा
एक हो जाऊं
तुमसे
न तो बिखरने
का
प्रयास होगा
"देशबंधु "



