गुरुवार, 29 जनवरी 2015

मेरे शब्द :मेरे अपने : वक्त

: चाहे मेरा मन पिछे मुड़ जाऊँ एक बार फिर पाठ्शाला जाऊँ सबक जिंदगी का जो ग़लत पढ लिया उसे दुरुस्त कर आऊ वक्त जो फिसल गया था रेत ...

मंगलवार, 27 जनवरी 2015

सुन्दर सौम्य सबल है तू मेरे जीवन में मेरी जान हर पल है तू हर पल को याद कर तुझे याद करता हूँ मेरा कल ,आज और कल है तू दुनिया में तुझसे क्या सुन्दर और मुझ कीचड़ के साथ पलता कमल है तू और क्या मधुर मांगू मेँ उससे बरसों जो सुनी हमने वो लता की ग़ज़ल है तू जो तू साथ रहे तो "बंधू" क्यों कर रोये जमाना माने न माने मेरी तो हर मुश्किल का हल है "देशबन्धु टी.जी. टी. आर्ट्स हिमाचल शिक्षा विभाग सर्वाधिकार सुरक्षित

सोमवार, 5 जनवरी 2015

दुनिया के मेले को हम छोड़ आये हैं तेरी यादों को तनहा छोड़ आये हैं बीत जाए सकूँ से जो वो अच्छी वरना तो जीने की तमन्ना हम कब के छोड़ आये हैं तुम चाहो तो निभा लो दुश्मनी शिदत से हम तो जमाने से दोस्ती निभाते आये हैं देख लेंगे फिर जमाने का रंग बदलना वरना तो हम कब के रंगों से रिस्ता तोड़ आये हैं