मंगलवार, 12 नवंबर 2013

इतने रिश्तों
इतनी उलझनों के बाद भी
डायरी के कुछ पन्ने
जीवन के उत्तरार्ध में
खाली रहने लगे हैं ...
कुछ लिखे पन्ने
खनकते सिक्कों से थे
कुछ चिर स्थायी
सनाटे कि तरह
दुबके पड़े हैं
न सपनों कि सूची
न पूरा करने कि कोई हड़बड़ी
न चिरंतन की खोज
न मिट जाने का भय
न डायरी के पन्नों में
गुम हो जाने कि चाहत
सुलझ जाये जो गुथी जीवन कि
वो इन्तजार करना
डायरी के खाली पन्नों को
रंगने से अच्छा लगा है
डायरी के कुछ पन्ने खाली रहने लगे हैं
@देशबंधु "

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें