सोमवार, 11 अगस्त 2014

मेरे शब्द :मेरे अपने : इतने रिश्तों इतनी उलझनों के बाद भी डायरी के कु...

मेरे शब्द :मेरे अपने : इतने रिश्तों इतनी उलझनों के बाद भी डायरी के कु...: इतने रिश्तों इतनी उलझनों के बाद भी डायरी के कुछ पन्ने जीवन के उत्तरार्ध में खाली रहने लगे हैं ... कुछ लिखे पन्ने खनकते सिक्कों से ...

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