मंगलवार, 15 अक्टूबर 2013

आह ...........


उसकी सूनी आँखों में आज नींद नहीं थी ! पिछले २० वर्षों का हर लम्हा उसकी आँखों से चलचित्र की तरह गुजरने के लिए बेताब था ! उसे अच्छी तरह याद था जैसे ये कल की ही बात हो कैसे उसके बाबूजी ने उसे गुबारे बेचने बाली रेहड़ी पर अपने साथ काम करने के  लिए राज़ी किया था ! तब उसने अपने सारे अरमानों को बाबूजी  की इच्छा और उनकी मदद के लिए अपना बचपन दावं पर लगा दिया था ! उसे ये भी याद था की किस तरह उसके फेफड़े जबाब दे जाते थे कच्ची उम्र में १ आज उसके सामने बाबूजी बाले ही हालात उसके सामने सुरसा की तरह मुहं वाये खडे थे १ कभी -कभी उसे लगता था की बाबूजी की तरह वह भाग्यशाली नहीं था एक तो उसकी बेटियों की तरह वह और उसका भाई पढने में तेज नहीं थे दूसरा  उसकी तरह उसके बाबूजी की बेटियाँ नहीं  थी १ वो सुबह ही से परेशान था जब स्कूल जाती बार सीमा ने कहा था बाबूजी आपसे मेरे भौतिक शास्त्र  प्रवक्ता आपसे मिलना चाहते है! वो अभी रेहड़ी पर बैठा ही था की सीमा के मास्टरजी आ गए १ भले आदमी थे नमस्कार के बाद कांपती आवाज में उसने ही पूछा था की आप उससे क्यों मिलना चाहते थे ? मास्टरजी ने सीमा की भूरी -भूरी प्रशंसा करते कहा था मेघसिंह तुम अपनी बेटी को खूब पढ़ाना वो बहुत तेज है तेरी गरीबी को वो ही दूर करेगी !प्रशंसा में भी उसे चक्र आता लगा !उसे लगा जैसे अब जीवन चलाना भी कठिन हो जायेगा १ इतना दर तो उसे दूसरी बेटी के होने पर भी नहीं लगा था जितना आज लग रहा था १ हालांकि सीमा के मास्टरजी अपनी मदद की भी बात कर रहे थे ! अब उसे लगने लगा था की गरीब के घर बुद्धिमान का होना एक अभिशाप  से कम नहीं होता! अभी छोटी का भी तो सोचना था १दो जून की रोटी तो उसने भी खानी थी १
बाहर बडे जोर -जोर से कुतों के भौंकने के कारण उसकी तंद्रा टूटी तो पता चला की सुबह बस होने ही बाली थी ! ..................पर उसके जीवन में घना अन्धकार सुबह के साथ ही और गहराता जा रहा था……………। क्रमश :

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