तेरे
जाने के बाद दूर तक
तेरे
क़दमों के निशान देखते रहे
यकीन
दिल को था तेरे ना आने का
बस
जगहसाई न हो जाये
दिल
को अपने दिलासा देते रहे
अब न
तो तेरे क़दमों के निशान है
न ही
अब कोई आश है बाकी
बाकी
है तो बस इतना की
सांसों में मेरी तेरे नाम की
आहट
है बाकी ..............
आँखों में जहाँ सपने होते
थे
बस उस
घरौंदे में अब
धुंधला सा तेरा एक अक्श है बाकी
अब न
तो कोई गम है
न ही
दिल में कोई दर्द है बाकी
जहाँ
से कोई न आये
वहां
तेरा चले जाना
उसकी
दिल में एक कसक है बाकी
अब
मेरे पास तेरे लिए कुछ नहीं
कुछ
है तो बस चंद शब्द है बाकी
देशबंधु ""
(अलसायी दोपहर में ........... स्वर्ग वासी मित्र की याद में
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें