गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

उस पार


उस पार

क्षितिज के उस पार

हर पल अपना होगा

तेरा  ही अहसास होगा

  तुमसे  दूरी का दुःख होगा

तुम होगे , हम होगे

बस नहीं होगा तो

दुनिया का ख्याल होगा

बीते पलों के साये होंगे

 आने वाला हर हसीन

ख्याल होगा

बस जहां से रुखसत हो जाऊं

तो , तेरा मेरा

बस हमारा प्रयाणं होगा

अंधेरों कि इस भूलभुल्या में

भटक गया हूँ

दौड़ कर जाऊं

उस पार तो

बस चिर उजियारा होगा

हर गुजरती सांस

झिंझोड़ जाती है

क्षितिज के उस पार

तो बस सांस से परे का

अहसास होगा

बस होगा तो

 अधूरे पन  का ख़याल होगा

एक हो जाऊं तुमसे

तो बिखरने का

प्रयास होगा

"देशबंधु "

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