रविवार, 13 अक्टूबर 2013


वक्त बदला है तो हवा भी बदलेगी

मौसमे -बहार में तय है कि फिज़ा भी बदलेगी

चल छोड़ उदासी हौसला रख

ज़ख्म गहरा  है तो  दवा भी  बदलेगी

रात के लम्बा होने पर लाज़मी है टूट जाना

  सुबह के नूर से तक़दीर भी बदलेगी

 नजर लग गयी है मेरे वतन को

पर नज़र् बट्टू के आने से नजर भी बदलेगी

अब ना खुदा का  ना राम का घर टूटेगा

 अब दिलो के दरमियाँ की हर दीवार टूटेगी

हो ना हो बन्धु"" कभी तो हुक्मरानों की नीयत भी बदलेगी

""देशबंधु""

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