तेरा जाना अच्छा नहीं था
बस गैरों से मिलकर
जाना
दिल तोड़कर रख गया
बात मुझ से ना
करना गवारा था
बस औरों से बतिया कर
जाना
तोड़ गया मुझे
तू हंसती रहे बस
तेरा मुझपर हँसना
तोड़ गया मुझे
संभलना गिर कर मेरी आदत थी
बस तेरा सहारा न देना
मंझधार में डूबता छोड़
गया मुझे
मानता में सबको अपना
पर तेरा अपना बनाकर गैर समझना
अपनों के बिच
बेगाना बनाकर छोड़ गया
मुझे
खुशियाँ भी मेरी थी
,आंसू भी मेरे
बस तेरा जाना
अश्कों के समंदर में
छोड़ गया मुझे
""देशबंधु ""
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