रविवार, 13 अक्टूबर 2013

पलकों के


पलकों के बाँध के पीछे

 कैद दो आंसू

आज

सैलाब ही ले आते

आज

गर आप वर्षों बाद

 रास्ता न बदलते तो

बदल जाती मेरी भी तासीर

 गर आज

 आप रास्ते में न आते

 वक्त बहुत बिताया था

 हमने रास्ते बदलने को

रास्ते बदल ही गए थे

 गर आप

मेरे रास्ते में न आते तो

ये आप का सितम है

या मेरा नसीब

समझ ही नहीं पाता

गर आप आज

 राह में नजर न

 मिलाते तो “

"देशबंधु ""

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