पलकों के बाँध के पीछे
कैद दो आंसू
आज
सैलाब ही ले आते
आज
गर आप वर्षों बाद
रास्ता न बदलते तो
बदल जाती मेरी भी तासीर
गर आज
आप रास्ते में न आते
वक्त बहुत बिताया था
हमने रास्ते बदलने को
रास्ते बदल ही गए थे
गर आप
मेरे रास्ते में न आते तो
ये आप का सितम है
या मेरा नसीब
समझ ही नहीं पाता
गर आप आज
राह में नजर न
मिलाते तो “
"देशबंधु ""
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