बदल जाते हैं दोस्त भी जब वो राहें बदल देते
हैं
हमारा क्या जिनकी राह् ही आप तक जाती हो
गुजरे जमाने की बात क्या करें अब
जब बात ही आप पर आकर ठहर जाती हो
गीला क्या करें पतवार के टूटने का
जब लहर ही साहिल पर पटक जाती हो
आरज़ू क्या करें अब आप से
जब हर साँस फ़ासले बढ़ा जाती हो
बदल लेते हैं वो मज़मून ही बात का
जब बात हमारी आती हो
हर नजर उन पर रहती है महफिल में
बस हमसे ही वो नजर फेर जाते हैं
""बन्धु""
जब भी नजर हमारी उन तक जाती हो
""देशबंधु""
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