रविवार, 13 अक्टूबर 2013

फना हो जाऊं तुम पर


बदल जाते हैं दोस्त भी जब वो राहें बदल देते हैं

हमारा क्या जिनकी राह् ही आप तक जाती हो

गुजरे जमाने की बात क्या करें अब

जब बात ही आप पर आकर ठहर जाती हो

गीला क्या करें पतवार के टूटने का

जब लहर ही साहिल पर पटक जाती हो

आरज़ू क्या करें अब आप से 

जब हर साँस फ़ासले बढ़ा जाती हो

बदल लेते हैं वो मज़मून ही बात का

जब बात हमारी आती हो

हर नजर उन पर रहती है महफिल में

बस हमसे ही वो नजर फेर जाते हैं ""बन्धु""

जब भी नजर हमारी उन तक जाती हो

 ""देशबंधु""

 

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