मंगलवार, 5 नवंबर 2013

आज भी


आज भी

मेरे देश में

 बेट्टिया पैदा नही कि जाती

 वो तो

उग आती हैं सीता कि तरह

आज भी

 मेरे देश मे

पाली नहीं जाती बेट्टिया

वो तो पल जाती हैं

निगम के कूड़ेदान पर पलने वाले

 कुकरमुत्तो कि तरह

आज भी

मेरे देश में पढ़ती नहीं

भोजन करने स्कूल जाती हैं बेट्टिया

आज भी

मेरे देश में सपने नहीं

उसका परिणाम देखती हैं बेट्टियाँ

इकसवि सदी के भारत में

आज भी नवरात्रो पर पूजी

और फिर

सारा साल नोची जाती है बेट्टियाँ

जी मेरे भारत में

आज भी ब्याही नही

बेची जाती हैं बेट्टियाँ

सौभाग्य नही

आज भी मेरे देश में

 मुशिबत समझी जाती हैं बेट्टिया

"देश्बंधु"

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