आज भी
मेरे देश में
बेट्टिया पैदा नही कि
जाती
वो तो
उग आती हैं सीता कि तरह
आज भी
मेरे देश मे
पाली नहीं जाती बेट्टिया
वो तो पल जाती हैं
निगम के कूड़ेदान पर पलने वाले
कुकरमुत्तो कि तरह
आज भी
मेरे देश में पढ़ती नहीं
भोजन करने स्कूल जाती हैं बेट्टिया
आज भी
मेरे देश में सपने नहीं
उसका परिणाम देखती हैं बेट्टियाँ
इकसवि सदी के भारत में
आज भी नवरात्रो पर पूजी
और फिर
सारा साल नोची जाती है बेट्टियाँ
जी मेरे भारत में
आज भी ब्याही नही
बेची जाती हैं बेट्टियाँ
सौभाग्य नही
आज भी मेरे देश में
मुशिबत समझी जाती हैं
बेट्टिया
"देश्बंधु"
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