सोमवार, 2 दिसंबर 2013

मालूम होता तो

जमाने के साथ
बदल जाने का
जरा सा भी
ख्याल होता तो
रिस्ते पर नाज न उठाते
रात इतनी ही
लम्बी होगी मालूम होता
तो चाहते आफताब न रखते
मुश्किल नहीं था
सफ़र मंजिले -जानिब
पर तुम नहीं रहोगे साथ
ख्याल होता तो
मंजिले -जानिब रफ़्तार ना लेते
खामोशियों से बेगाने
नहीं हैं हम
सिसकियों का दर्द
मालूम  होता तो
अपनों का साथ न लेते
फूल पत्ता -पत्ता बिखर जायेगा
मालूम होता तो
कभी तेरा दिया गुलाब ना लेते
सूख जाएगा रिस्तों का दरखत
मालूम होता तो
तमन्ना -ये बहार न रखते
गुजर जाती
हर लहर टकरा कर
गर हाथों में तेरे 
पतवार न होते तो 
चमक न पाते न सही
टिमटिमाते आसमां में जहाँ के
गर तुम कसूरवार न होते तो .......... 
"देशबंधु" 


 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें