मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

मेरे शहर में मंदिर बहुत हैं
पर आज भी
एक अदद इंसान कि तलाश है मुझे ......!

लगते यहाँ रोज भंडारे हैं ...
गरीब कि भूख जो मिटा दे
उस शख्श की तलाश है मुझे ............!

रोशनी जगमगाती यहाँ हर शाम को
मिटा दे जो दिलों के अँधेरे ...
उस चिराग कि तलाश है मुझे ...........!

है भीड़, अजनबी , जाने पहचानों की
पर आज भी
अपनी पहचान कि तलाश है मुझे ......!

लिखने वालों की कमी नहीं यहाँ
वयाँ कर पाये जो सच को
उस शायर की तलाश है मुझे ........!

जहाँ भी जाए मंदिर है
पर उस तक जो जाए
उस राह की तलाश है मुझे ........!

शोर है हर बात का
जो पसरा सन्नाटा सुन पाये
उस राहगीर की तलाश है मुझे ....!

तलाश थकती नहीं
मैं थक जाता हूँ
ठिठकती है पर रुकती नही
आज "फिर वही तलाश है मुझे ".......!
"देशबंधु"

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