आज फिर हम शीशे में
अपनी तावीर देखेंगे
तुम्हारी खिंची लकीर देखेंगे
लूट गयी जो अपनों के हाथों
आज फिर हम अपनी
वो तकदीर देखेंगे
आज फिर हम तुम्हारी खिंची लकीर देखेंगे
जमाने भर की बातें
और उन बातों की बातें
आज फिर हम
हर अफवाह का असर देखेंगे
आज फिर हम शीशे में
तुम्हारी खिंची लकीर देखेंगे
तुमने जो वादे किये थे
उन वादों का और
अपनी दुआओं का असर देखेंगे
आज फिर हम शीशे में
तुम्हारी खिंची लकीर देखेंगे
अपनो और बेगानों में
फर्क देखेंगे
दिल में उमड़ते सैलाब का
साहिल को बहा देना वाला
वो मंजर देखेंगे
आज फिर हम शीशे में अपनी तावीर देखेंगे “देशबंधु”
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