शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

  आज फिर हम शीशे में
  अपनी तावीर देखेंगे
  तुम्हारी खिंची लकीर देखेंगे
  लूट गयी जो अपनों के हाथों
  आज फिर हम अपनी
  वो तकदीर देखेंगे
 आज फिर हम तुम्हारी खिंची लकीर देखेंगे
 
  जमाने भर की बातें
  और उन बातों की बातें
  आज फिर हम
  हर अफवाह का असर देखेंगे
  आज फिर हम शीशे में
  तुम्हारी खिंची लकीर देखेंगे

 तुमने जो वादे किये थे
  उन वादों का और
  अपनी दुआओं का असर देखेंगे
 आज फिर हम शीशे में
  तुम्हारी खिंची लकीर देखेंगे
   अपनो और बेगानों में
  फर्क देखेंगे
  दिल में उमड़ते सैलाब का
  साहिल को बहा देना वाला
  वो मंजर देखेंगे
आज फिर हम शीशे में अपनी तावीर देखेंगे   देशबंधु”

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