रविवार, 10 नवंबर 2013

न बात करता
न ही बातों में
तुम्हारा जिक्र होता
ये तो दर्द है
जो बार –बार...
नज्म बनकर उतर आता है
तुम्हारा नाम
जुबां पर आ जाए मुमकिन नहीं
पर दर्द का क्या
जो आँखों में छलक आता है
खो जाऊं दूर कहीं
इस जहां के बेगानों में
पर उस ख्याल का क्या
जो हर बार
तुम्हे साथ लिये आता है
मैं तो तुम्हारा ख्याल भी छोड़ देता
पर उस नजम का क्या
जिसके लिए
मैं
आज भी ज़िंदा हूँ........

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