शुक्रवार, 26 सितंबर 2014

तो रो देती है माँ

आज भी कम खाता हूँ तो रो देती है माँ दुनिया बालों की बुरी और काली बलाओं से काला टिका लगा कर बचाती है माँ १ खा नहीं पाता हूँ अब फिर भी मेरे लिए बड़े चाव से कांपते अपने हाथों से पूरी बनाती है माँ २ होता हूँ उदास तो आज भी सिरहाने बैठी होती है माँ निकल आया हूँ बहुत दूर पर दूरी से भी आशीर्वाद देती है माँ ३ रहता हूँ खामोश सा मैं फिर भी ना जाने कैसे? तेरी आँखे सब कुछ बता देती है माँ ४ तेरे पावन चरणो में सर रखकर जन्नत हो आना चाहता हूँ तुझे हर पल खुश रखना चाहता हूँ पर तू मेरी खुशी मेँ ही खुश क्यों?रहती है माँ ५ "देशबन्धु" टी. जी. टी. (आर्ट्स) शिक्षा विभाग हिमाचल प्रदेश (सर्वाधिकार सुरक्षित )

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