शुक्रवार, 26 सितंबर 2014

जहाँ को छू लुंगी मुझे उड़ान भर लेने तो दे छोटा पड़ जाएगा आसमान भी बाबुल मेरे सपनों को पंख लग जाने तो दे नहीं कोई गम होगा खुशियों को मेरी सिमट आने तो दे उदासी तुम्हारी बिखर जाएगी मेरी आँखों को नम हो जाने तो दे न कोई बंधन हो न कोई लक्षमन रेखा बस मुझे आज की सीता हो जाने तो दे संभल कर चलना जो सिखाया तूने कदम- कदम पर हाथ पकड़ कर चलाया तूने मुझे भी अपना सहारा बन जाने तो दे चल सकूँ में दूर तक तूने देर तक बाहँ थामे रखी क्षितिज के उस पार से तेरी खुशियाँ मुझे अब लाने तो दे .................... मत धो मेरे सपनो का बोझ तू मुझे भी तो तेरे सपनों का सारथी बन जाने तो दे ...................... १ (बेटी दिवस पर लिखी .......मेरी बेटी नैना ,एन्ना को समर्पित ) ("देशबन्धु" सर्वाधिकार सुरक्षित )

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