सोमवार, 27 अक्टूबर 2014

तेरे ही ख्याल से क्यों ? शुरू होती है जिन्दगी शाम होते - होते क्यों ? तनहा हो जाती है जिंदगी बिखर गए जो मोती संभाल क्यों ? नहीं पाती है जिंदगी उजड़ गयी हर बस्ती याहं फिर रेत के घरोन्दे क्यों? बनाती है जिंदगी हाथ पकड़ कर दूर छोड़ आये जो उन्हें ही हमसफ़र क्यों ? बनाती है जिंदगी अश्कों के इस मौसम में "बंधू" क्यों ? फिर से मुस्कराती है जिंदगी "देशबन्धु" टी. जी. टी. (आर्ट्स) हिमाचल शिक्षा विभाग

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