घाव जो दिल पर लगे हैं
उन्हें आंसू बनकर बह जाने दो
अभी मत छेड़ो नए नग़मे तुम
पुरानी ग़ज़ल को रूह तक उतर जाने तो दो
अभी मत लिखो नयी इबारत तुम
हथेलिओं की लकीरों को थोड़ा और उलझ जाने तो दो
बरसों तक बसा रहा चेहरा जो दिल में
उसे थोड़ा धुंधला हो जाने तो दो
मत देख ख़्वाब नए तू अभी
बरसों देखे जो ख़्वाब हमने मिलकर
रूह से मेरी
उन ख़्वाबों को निकल जाने तो दो ………………………………..|"देशबंधू"
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