बुधवार, 8 अक्टूबर 2014

जब भी मैं रो लेता हूँ

जब भी मैं रो लेता हूँ तेरे दिए जख्म सी लेता हूँ जब भी तुम याद आते हो ग़मों के ज़ाम चुपके से पी लेता हूँ डर लगता जब तन्हाई से तेरी तस्वीर को सीने से लगा लेता हूँ जब भी बात तेरी चले महफ़िल में महफ़िल से रुखसत हो लेता हूँ बिखरे यादों के मोती सिने में फिर संजो लेता हूँ दिल जब भी बेवफा करार देता तुझे मैं दिल को अनसुना कर देता हूँ छूट गए जो वादे अधूरे कहीं उन्हें हर बार मैं अपनी किस्मत मान लेता हूँ रो लेता हूँ जब भी मैं ................. तेरे दिए जख्म सी लेता हूँ १ देशबन्धु " टी .जी. टी. (आर्ट्स) हिमाचल शिक्षा विभाग (सर्वाधिकार सुरक्षित )

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