बुधवार, 8 अक्टूबर 2014

गमलों में उगने वाले लोग

गमलों में उगने वाले लोग बरगद की बातें करते हैं जो कभी हमारी बातें करते थे आज जमाने भर की बातें करते हैं कभी दिलों में रहने वाले आज आशियाने की बाते करते हैं कभी ऊंचा उड़ने बाले आज आसमान में ठिकाने की बातें करते हैं बेगाने हुए जो बर्षों से वो मेरे अपने होने की बातें करतें हैं खिलौनों के लिए रोने वाले कैसे चाँद की बातें करते हैं छोड़ गए थे जो सरे राह ना जाने कैसे मिलन की बातें करते हैं सूखे से इस सावन में "बंधू" कैसे हम सैलाब की बातें करते हैं .................

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