हमने मुहब्बत के कई तमाशे देखे हैं
दिल टूटते और ताजमहल बनते देखे हैं
बात दिलों की
करते - करते
लोग दिललग्गी
करते देखे हैं
गुजर जाते हैं जो लम्हे
उन्हें लोग याद करते देखे हैं
छोड़ जाते हैं जो राहे सफर में
हमने
लोग उनक़ी राह् तकते देखे हैं
जो कभी सदा ना दे
उनकी सदा सुनते हमने लोग देखे हैं
हमने मुहब्बत के कई तमाशे देखे हैं ...
साथ निभाने की कसमे खाने बाले
कसमो का हिसाब लगाते देखे हैं
चेहरा जो उनका देख् कर जीने बाले
आज मुँह फेरते देखे हैं
जो बफा की हामी भरते थे
वो ही बेबफायी करते देखे हैं
ये तमाशा मुहब्बत का ही है बन्धु""
हमने तो गूँगे भी सूने में बातें करते देखे
हैं
देशबन्धु""
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