तारों की बस्ती में चाँद तनहा सा क्यों है ?
पूछूं में तेरे दिल से
कोई सवाल ये अरमान सा क्यों है ?
बहारों के मौसम में बुझा बुझा सा गुलिस्तां
और परेशान सा गुलफाम क्यों है ?
वक़्त सरक गया जो हाथों से
फिर मेरे हाथों की लकीरों में
फिर तेरा नाम आज भी क्यों है ?
मिट्ने का मेरे कोई हिसाब न था
गुनहगारों में तेरा नाम आज भी क्यों है
गुजर गयी रात चांदनी
अलसाया सा चाँद क्यों है ?
बहारों के इस मौसम में
बंधू तू उदास सा क्यों है?
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