दुनिया के मेले को हम छोड़ आये हैं
तेरी यादों को तनहा छोड़ आये हैं
बीत जाए सकूँ से जो वो अच्छी
वरना तो जीने की तमन्ना
हम कब के छोड़ आये हैं
तुम चाहो तो निभा लो
दुश्मनी शिदत से
हम तो जमाने से
दोस्ती निभाते आये हैं
देख लेंगे फिर
जमाने का रंग बदलना
वरना तो हम कब के
रंगों से रिस्ता तोड़ आये हैं
वो जफा करें हम वफ़ा करें ... यही तो जीवन होना चाहिए ...
जवाब देंहटाएंक्या ...........खूब कही है दिगम्बर जी
जवाब देंहटाएंबस आपका प्रशंसक हूँ हौसला बनाये रखें