सोमवार, 5 जनवरी 2015

दुनिया के मेले को हम छोड़ आये हैं तेरी यादों को तनहा छोड़ आये हैं बीत जाए सकूँ से जो वो अच्छी वरना तो जीने की तमन्ना हम कब के छोड़ आये हैं तुम चाहो तो निभा लो दुश्मनी शिदत से हम तो जमाने से दोस्ती निभाते आये हैं देख लेंगे फिर जमाने का रंग बदलना वरना तो हम कब के रंगों से रिस्ता तोड़ आये हैं

2 टिप्‍पणियां:

  1. वो जफा करें हम वफ़ा करें ... यही तो जीवन होना चाहिए ...

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  2. क्या ...........खूब कही है दिगम्बर जी
    बस आपका प्रशंसक हूँ हौसला बनाये रखें

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